पशु क्रूरता : मनुष्य के आतंक ने एक बार फिर की साक्षात् नंदी जी हत्या।

पशु क्रूरता का एक नया मामला बदांयू से सामने आया। इस घटना को अंजाम देने वाले बेरहम मनुष्य ने एक बार फिर साक्षात् नंदी महाराज को मौत की नींद सुला दिया। घटना को भाले द्वारा अंजाम दिया गया। उक्त राक्षस प्रवृति वाले व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज़ कर लिया गया है। 

पशु क्रूरता : मनुष्य के आतंक ने एक बार फिर की साक्षात् नंदी जी हत्या।
                                          Photo Credit Needpix 
 

पशु क्रूरता कर बदांयू में की नंदी महाराज की हत्या 

        बदायूं के थाना बिसौली के गांव सिथौली से पशु क्रूरता का एक और मामला देखने को मिला। इस घटना में गांव निवासी महेश ने बताया की बीती शाम 6 बजे के आसपास बेसहारा घूमने वाले गौ वंश को गांव के ही रहने वाले दूसरे व्यक्ति बंगाली पुत्र झंडू ने भाला लेकर दौड़ाया और भाले द्वारा उस गौ वंश पर प्रहार किये। जिससे उस गौ वंश की मृत्यु हो गयी। इस व्यक्ति के खिलाफ महेश ने थाने में शिकायत दी। पुलिस ने बंगाली के खिलाफ पशु क्रूरता अधिनियम 1960 की धारा 11 व IPC की धारा 429 के तहत मुकदमा दर्ज कर जाँच प्रारम्भ कर दी है।


         मुख्य रूप से हम यहाँ आपसे यह कहना चाहते है की क्या मनुष्य इतना स्वार्थी हो गया है की वह अपनी इछाओ की पूर्ति के लिए मंदिरो में पत्थर के नंदी महाराज को तो पूजता है उनके कान में अपनी इच्छाएं बताकर उन्हें पूरी कराने की महत्वकांशा रखता है लेकिन जब अपने घर में साक्षात् नंदी महाराज जन्म लेते है तो उन्हें सड़क पर छोड़ दिया जाता है। बात यही खत्म नहीं होती फिर वही मनुष्य उस नंदी महाराज को आवारा नाम दे देता है और नंदी महाराज गलती से अपना हक़ मांगने अपने ही खेत में चला जाए तो उसे भालो से, डंडो से पीटा जाता है और अंत में दर्द से कररहाते हुए नंदी महाराज अपना दम तोड़ देते है।

          पशु क्रूरता की इन् घटनाओं पर यदि हम सभी विचार करे तो पाएंगे इसका मुख्य कारण, वह कारण आखिर है क्या ? भाजपा पार्टी ने अपनी सरकार गौ माता और श्री राम के नाम पर बनाई लेकिन श्री राम का घर तो भाजपा ने बड़े ही भव्य रूप में विकसित किया परन्तु गौ माता को भाजपा सरकार आज भी न्याय नहीं दिला पाई है। देश के कई राज्यों में गौ माताओ को आज भी खुले आम काटा जा रहा है। और जिन राज्यों में गौ हत्या अपराध है वहा भी अपराधी को ज्यादा सजा नहीं मिलती। देश को इस समय जरुरत है की पशु क्रूरता के खिलाफ बने कानून पशु क्रूरता अधिनियम 1960 में कड़ा बदलाव किया जाए। पशुओ के खिलाफ अपराधी को कड़ी सजा हो इससे ही कानून का डर लोगो में बनाया जा सकता है। क्योकि अभी यह कानून बेहद कमजोर है जिस कारण अपराधी पशु क्रूरता करने से नहीं डरते है।

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